किडनी का तोह्फ़ा
भाग 1
रोमित और जूली दोनों दिल्ली के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में बी.टेक के अंतिम वर्ष में थे . दोनों ही उच्च मध्यम वर्ग के परिवार की संतानें थीं . रोमित का परिवार दिल्ली में ही रहता था जबकि जूली आगरा की रहने वाली थी . रोमित की एक बड़ी बहन भी थी जबकि जूली अपनी माता पिता की एकमात्र संतान थी . रोमित और जूली दोनों मेधावी छात्र थे और पढ़ाई के अलावा कॉलेज की सांस्कृतिक और मनोरंजन गतिविधियों में भी हिस्सा लेते थे . एक बार उन्होंने शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक 'रोमियो एंड जूलियट' में भी हिस्सा लिया था . तभी से उनके दोस्त उन्हें रोमियो और जूलियट कहकर बुलाते थे . वैसे भी दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे . यह पसंद जल्द ही प्यार में बदल गई और उनकी प्रेम कहानी न केवल छात्रों के बीच, बल्कि दोनों के माता पिता तक पहुँच गयी थी . समय पर रोमित और जूली ने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली . दोनों को कैंपस से अच्छा जॉब ऑफर भी मिल गया था . इत्तफ़ाक़ से दोनों की पोस्टिंग मुंबई में हुई थी और कुछ महीने की ट्रेनिंग के बाद उनकी पोस्टिंग लंदन में होने वाली थी .
जूली की माँ यमुना देवी ने पति से कहा “ ये दोनों बच्चे कुछ महीनों बाद लंदन चले जायेंगे . दोनों प्यार करते हैं .कहीं विदेश में कुछ गलत कदम न उठा लें . इसलिए क्यों न हमलोग उनकी शादी की बात रोमित के माता पिता से कर लें . उन्हें भी दोनों के प्यार की पूरी जानकारी है . हमें लगता है उन्हें भी कोई ऐतराज़ नहीं होना चाहिए ? “
“ तुम ठीक कह रही हो . रोमित की बड़ी बहन रेणु की शादी भी हो चुकी है , अब रोमित की बारी है . आगरा से दिल्ली कोई ख़ास दूर भी नहीं है . चलो एक दो दिनों में चल कर उनसे बात कर लेते हैं . सुबह में अपनी कार से ही चलेंगे और शाम या रात तक आसानी से वापस आ जायेंगे . “ जूली के पिता नवीन ने कहा
एक दिन जूली के माता पिता ने रोमित के घर जा कर उनसे कहा “ मेरी बेटी रोमित से प्यार करती है और शायद रोमित भी जूली से उतना ही प्यार करता है . हमें उम्मीद है आपको भी इस बात की जानकारी होगी . अगर आपको स्वीकार हो तो हम उन दोनों की शादी की बात कर सकते हैं . “
रोमित के पिता रोहित ने कहा “ हाँ , अगर रोमित चाहे तो हमें दोनों की शादी से कोई ऐतराज़ नहीं है . “
रोमित की माँ गीता देवी ने कहा “ अजी ऐतराज हमें भी नहीं है . हमें दोनों के प्यार की जानकारी है और हम इस रिश्ते के लिए तैयार हैं . “
नवीन ने कहा “ तब आगे आपकी आज्ञा हो तो हम दोनों की शादी की तैयारी शुरू कर दें . “
गीता और रोहित दोनों ने कहा “ बस एक बार रोमित से बात कर लेते हैं फिर शादी की तारीख भी तय कर लेंगे . शादी की तारीख दोनों बच्चों और उनके परिवार की सुविधा के अनुसार होनी चाहिए . है न ? “
यमुना ने कहा “ जी , आपने बिल्कुल सही कहा है . हम भी एक बार जूली से इस बारे में बात कर लेते हैं . “
फिर कुछ देर बाद रोहित ने कहा “ पर मेरी एक शर्त है . “
अचानक शर्त की बात सुनकर जूली के माता पिता चौंक गए थे . उनके चेहरे का भाव देख कर रोहित ने कहा “ भाई साहब , घबराने की कोई बात नहीं है . मेरी शर्त मात्र इतनी सी है कि हम बारात लेकर आगरा नहीं जायेंगे . आपलोगों को कुछ दिनों के लिए दिल्ली आना पड़ेगा और शादी हम यहीं अपने घर से ही करेंगे . “
रोमित की माँ ने आगे कहा “ भाई साहब , आप चिंता न करें . आपलोगों के दिल्ली में रहने के लिए घर का इंतजाम हम कर देंगे . इनके एक निकट मित्र का बंगला खाली पड़ा है . आपके आने के पहले उसकी सफाई आदि हम करा देंगे . “
जूली के माता पिता निश्चिन्त होकर आगरा वापस आ गए .
जूली और रोमित दोनों के माता पिता ने अपने अपने बच्चों से शादी के बारे में बात की . बात क्या करनी थी बस दोनों की सुविधानुसार सगाई और शादी की तिथि निश्चित करनी थी . पहले तो दोनों ने एक ही बात कही “ शादी तो हमें करनी ही है पर इतनी जल्दी क्या है ? “
दोनों के माता पिता इस बात पर अड़े थे कि अगर लंदन जाना है तो वहां जाने के पहले तुम दोनों को शादी करनी होगी . अंततः सभी लोगों से बात करने के बाद दो सप्ताह के बाद सगाई की तिथि तय हुई और उसके तीन सप्ताह के बाद शादी की तारीख रखी गयी , यानी कुल मिलाकर करीब करीब चट मंगनी और पट ब्याह वाली बात . शादी के दो सप्ताह के अंदर ही दोनों को मुंबई में कंपनी को रिपोर्ट करनी थी .
तय समय पर जूली और रोमित की सगाई बड़े धूम धाम से हुई . सगाई के बाद उनके कॉलेज के कुछ दोस्त शिमला जा रहे थे . दोस्तों में कुछ लड़के , कुछ लड़कियां और एक जोड़ी भी थी जिनकी नयी नयी शादी हुई थी . जूली और रोमित को भी उनलोगों ने साथ चलने के लिए कहा . शुरू में रोमित इसके लिए तैयार नहीं हो रहा था क्योंकि तीन सप्ताह के अंदर शादी भी थी . जूली ने कहा “ आजकल सब कुछ इवेंट मैनेजर और वेडिंग प्लानर कर देते हैं . हमें तो सिर्फ अपनी पसंद के वेडिंग ड्रेस और गहने लेने होंगे . इतना तो हम लोग आसानी से मैनेज कर सकते हैं . वैसे बाकी हमारे परिवार के अन्य लोग भी मदद करेंगे . “
“ कम से कम कितने दिनों का ट्रिप होगा ? “ रोमित ने दोस्तों से पूछा
“ वैसे तो जितना ज्यादा दिन वहां रहेंगे यहाँ की गर्मियों से राहत मिलेगी पर कम से कम दस दिन ठीक रहेगा . “
“ नहीं , मैं और जूली ज्यादा से ज्यादा एक सप्ताह तक तुम्हारा साथ दे सकते हैं . “
सभी दोस्तों ने विचार कर फैसला किया “ ठीक है . हमारा पहला पड़ाव चंडीगढ़ और अंतिम पड़ाव डलहौज़ी होगा . चंडीगढ़ बस कुछ घंटों के लिए ही रुकेंगे . एक सप्ताह में हम शिमला , धर्मशाला और डलहौजी कवर कर लेंगे . अगर किसी को डलहौजी में ज्यादा दिन रुकने का इरादा हो तो वह रुक सकता है . “
अंतिम फैसला हुआ की पूरी टीम आठ दिनों के अंदर शिमला टूर कर वापस आ जाएगी . तब रोमित और जूली उनके साथ शिमला जाने के लिए तैयार हुए . दिल्ली से ही पूरे ट्रिप के लिए उन्होंने एक मिनी बस किराये पर ले
सभी दोस्तों ने शिमला में मॉल रोड , क्राइस्ट चर्च , द रिज , हनुमान मंदिर आदि दर्शनीय स्थलों का भरपूर आनंद उठाया . शिमला के बाद उनका अगला पड़ाव धर्मशाला था .
धर्मशाला से थोड़ी ही दूरी पर कुछ अधिक ऊंचाई पर मक्लोइड्गंज है . वहां प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर और बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा का निवास स्थान भी है . हालांकि धर्मशाला में रोमित और जूली के लिए अलग अलग रूम बुक थे पर अगले दिन वहां होने वाले एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के चलते उन्हें एक ही रूम में एडजस्ट करना पड़ा . शहर के किसी भी होटल में कोई कमरा खाली नहीं था . एक दोस्त ने सलाह देते हुए जोड़ी से कहा “ क्यों न तुमलोग दो दिनों के लिए अलग अलग कमरों में सो लो ताकि दोनों लड़कियां एक कमरे में और दोनों मर्द दूसरे में एडजस्ट कर लें .”
उसने तुरंत कहा “ क्यों हमारे हनीमून ट्रिप को तुमलोग बर्बाद कर रहे हो ? अरे रोमित और जूली की सगाई भी हो चुकी है और दो सप्ताह के बाद शादी भी होने वाली है . वे भी एक रूम में एडजस्ट कर सकते हैं . “
एक दूसरे दोस्त ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा “ हाँ , यही ठीक रहेगा . “
रोमित और जूली एक दूसरे की ओर देख रहे थे . तब बाकी दोस्त अपने अपने कमरे में जाने लगे . मजबूरन उन दोनों को भी एक ही कमरे में जाना पड़ा . कमरे में जाने के बाद रोमित ने जूली से कहा “ तुम बेड पर सो लेना मैं यहाँ सोफे पर सो लूँगा . दो रात की बात है , परसों सुबह सुबह हमलोग यहाँ से जा रहे हैं . “
खैर उस रात तो रोमित और जूली ने अलग अलग बिस्तर और सोफे पर सो कर बिताये . दूसरे दिन मौसम कुछ ख़राब था . हालांकि जून के पहले सप्ताह में आमतौर पर वहां बारिश नहीं होती है पर सुबह से ही आसमान में बादल छाये थे . हल्की बूंदाबांदी हो रही थी . क्रिकेट मैच पर भी खतरा मंडरा रहा था . खैर , दोपहर के बाद बारिश बंद हो गयी थी और बादल भी छंटने लगा था . मैच को 50 ओवर का न होकर कम ओवर का किया गया . कुछ दोस्त ब्लैक में टिकट लेकर मैच देखने गए . रोमित और जूली भी एक दूसरी जोड़ी के साथ मैच देखने गए .
क्रमशः